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Best CTET Hindi notes 2020 for prepration

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लेव वाइगोत्सकी का सामाजिक विकास का सिद्धांत

लेव वाइगोत्सकी का सामाजिक विकास का सिद्धांत

लेव वाइगोत्सकी का सामाजिक विकास का सिद्धांत :-

     रुसी मनोवैज्ञानिक लेव वाइगोत्सकी का सामाजिक विकास का सिद्धांत बालक का समाज के साथ अन्त: क्रिया द्वारा अर्जित अधिगम पर निर्भर है ।

     लेव वाइगोत्सकी का मत था कि - "बालक में पहले सामाजिक अधिगम होता है, उसके पश्चातू विकास" ।

     यह मत जीन पियाजे के विचारों के विपरीत है। जीन पियाजे का मत था कि - "बालक में पहले विकास होता है, उसके बाद वह अधिगम की ओर उन्मुख होता है " ।

     वाइगोत्सकी का मानना था की बालक को समाज में 
जिस प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध होंगी , उसका विकास भी उसी प्रकार का होगा।

बालकों की अवस्था व उनका सामाजिक विकास :-

शैशवास्था :- 

    • जन्म के समय शिशु में सामाजिकता का अभाव होता है।
    • वह स्वार्थी प्रवृत्ति का होता है ।
    • माता-पिता का व्यवहार उसके आगे के सामाजिक विकास के लिए जिम्मेदार होते हैं ।

बाल्यावस्था :-

    • बाल्यावस्था में बालक का सामाजिक परिवेश विस्तृत हो जाता है, वह विद्यालय जाना प्रारम्भ कर देता है।
    • बालक इस अवस्था मे समाज से अन्तःक्रिया करके सीखना प्रारम्भ कर देता है ।
    • अपने किये गये कार्यों के लिए प्रशंसा की तीव्र लालशा
 
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार - बाल्यावस्था " प्रतिद्वन्द्वात्मक-समाजिकरण " की अवस्था है ।

किशोरावस्था :-

    • इस अवस्था में बालक मे लिंग सम्बंधी चेतना तीव्र हो जाती है । किशोर व किशोरीयाँ अपने हमउम्र - समुह के सक्रिय सदस्य होते हैं ।
    • इस अवस्था में सहानुभूति, सहयोग, सद्भावना, परोपकार, और त्याग का अद्भुत सामंजस्य देखने को मिलता है ।
    • किशोरावस्था संवेगो की तीव्र अभिव्यक्ति की अवस्था है ।
    • मैत्री भाव का विकास [ समलिंगी मित्रता ]
    • उत्तर किशोरावस्था में [ विषमलिंगी आकर्षण ]
    • समुह या टोली बनाना 

हरलाॅक के अनुसार - टोली या समुह बालक में आत्मनियंत्रण, साहस, न्याय, सहनशीलता आदि गुणों का विकास करता है ।

स्काॅफहोल्डिंग :- 

     लेव वाइगोत्सकी ने समीपस्थ विकास के क्षेत्र [ ZPD - ZONE OF PROXIMAL DEVELOPMENT ] में एक सम्प्रत्यय दिया जिसका नाम स्काॅफहोल्डिंग है । जिसका अर्थ है - "सहारा देना" अर्थात बालक द्वारा किसी समस्या समाधान के लिए किसी अन्य व्यक्ति की सहायता लेना।
 👉  लेव वाइगोत्सकी का मत था की बालक के शारीरिक , मानसिक तथा संवेगात्मक विकास का उसके सामाजिक विकास से घनिष्ठ सम्बन्ध है । विकास के ये चारों पक्ष एक दूसरे को प्रभावित करते हैं । इनके सन्तुलित विकास से ही व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास सम्भव है । इस विचार से व्यक्ति के सम्यक विकास के लिए व्यक्तिकरण और समाजीकरण दोनों की आवश्यकता होती है । व्यक्ति और समाज एक दूसरे के पूरक हैं । अत : व्यक्तित्व की उन्नति के लिए सामाजिक भावना का विकास अति आवश्यक है । उन्होंने खेल को बालक के संज्ञानात्मक, भावात्मक व सामाजिक विकास के लिए महत्वपूर्ण कारक बताया है ।

      लेव वाइगोत्सकी के अनुसार भाषा के विकास मे भी समाज की अहम् भुमिका है । यह विकास दो चरणों में होता है ।

( 1 ) मस्तिष्क द्वारा [ 3 से 7 वर्ष ] आन्तरिक विचार से
( 2 ) वाह्य विचार से [ समाज द्वारा ]

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